एहसास

तुम न हो आसपास तो अधूरा सा लगता है
दिल पर एक पत्थर सा हो ऐसा लगता है
कैसे करू बयान किस तरह तुम छाये हो
ज़िन्दगी से निकल गयी हो जान वैसा लगता है

खुदा ने खुद को उतारा है ज़मीं पर तेरी रूह बनकर
किस तरह मिलाया उसने मुजको मुझसे
एक पत्थर पर रहमे-नज़र करके
मूरत को दी हो जान वैसा लगता है

तुम न हो आसपास तो अधूरा सा लगता है
दिल पर एक पत्थर सा हो ऐसा लगता है

Author: Anil Hudda

Learner, observer, businessman, curious.

2 thoughts on “एहसास”

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